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बंगाल की सियासत में बीजेपी के अच्छे दिन | Suvendu Adhikari vs Mamta Banerjee politics

राजनीति में हर दांवपेंच भविष्य के किसी घटना के बीज को लेकर पनपता है इसीलिए सियासत की चाल शतरंज से भी पेचीदी समझी जाती है यानि सियासत में जो होता हुआ दिखे वह जरूरी नहीं कि वास्तव में वैसा ही हो।
 बंगाल में बीजेपी ने जबरदस्त जीत हासिल की , बेशक इसके पीछे अनेकों अनेक तर्क परिस्थितियां हो सकतीं हैं लेकिन अंतिम परिणामों से परिलक्षित हो रहा था कि टीएमसी को लेकर लोग बदलाव के मूड में थे।
अब जब बीजेपी पूर्ण पावर के साथ सत्तासीन है तो स्वाभाविक रूप से सत्ता से सभी नेता से लेकर अभिनेता तक जुड़ने की कवायद में लगे हैं और मौजूदा समय की बंगाल की खबर खंगाली जाए तो टीएमसी के तमाम नेता पाला बदलने की जुगत में है और बीजेपी भी अपने स्वभाव अनुसार देर- सवेर अपने में समाहित कर ही लेगी... !
बेशक इससे बीजेपी को तत्कालीन रूप से सियासी लाभ मिलेगा,  दरअसल विपक्ष कमजोर हो तो सत्ता आसान हो जाती है ; लेकिन सवाल फ़िर यह है कि क्या यह दीर्घकालीन राजनीतिक की पटकथा होगी... सवाल का आज कोई माकूल जवाब नहीं है लेकिन वो नेता जो विपक्ष से बीजेपी में चले जायेगे उनके लिए तात्कालीन और दीर्घकालिक दोनों ही प्रकार के लाभ है.. एक तो  वे सत्ता सीन दल का हिस्सा रहेंगे और दूसरा टीएमसी के जाने से जो दिक्कत हो सकती थो उससे अब खुद बीजेपी अभय देगी ... यानि फिर बदला क्या??  इसका जवाब पहले ही पंक्ति में निहित है कि "सियासत में जो होता हुआ दिखे वह जरूरी नहीं कि वास्तव में वैसा ही हो" 
बहराल बीजेपी का बंगाल में मूड गंगासागर की तरह दिखता जहां सब छोटे बड़े जल प्रवाहनिया बड़े सागर में विलीन हो जाती हैं 

(Durga Sharan Dubey)
https://x.com/DurgasharanDube

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